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योग और पंचकर्म से असाध्य रोगों के समाधान संभव: कुलपति डॉ. त्रिपाठी

हरिद्वार। अमृता विश्व विद्यापीठम, जगजीतपुर (हरिद्वार) परिसर के सभागार में 15वीं राष्ट्रीय कार्यशाला “मानव शरीर विज्ञान-मनोविज्ञान पर योगिक-पंचकर्म चिकित्सा की प्रभावशीलता” का भव्य शुभारंभ हुआ। यह पाँच दिवसीय कार्यशाला 26 अप्रैल तक आयोजित की जाएगी।

मुख्य अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन करते हुए कहा कि योग और पंचकर्म भारतीय चिकित्सा पद्धति की रीढ़ हैं। आधुनिक विज्ञान के साथ इनके समन्वय से जटिल एवं असाध्य रोगों के उपचार की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।

कार्यशाला का आयोजन निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन, श्री भगवान दास आदर्श संस्कृत पी.जी. कॉलेज के योगिक विज्ञान विभाग तथा अमृता विश्व विद्यापीठम के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम माता अमृतानंदमयी देवी ‘अम्मा’ के आशीर्वाद एवं संरक्षक योग गुरु एम.एम. स्वामी संतोषानंद देव जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है।

आयोजन अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कुमार ने कहा कि योग और पंचकर्म भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा के अभिन्न अंग हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर शोध का प्रमुख विषय बन चुके हैं। कार्यक्रम की उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. उर्मिला पांडे ने कहा कि अमृता विश्व विद्यापीठम, हरिद्वार परिसर “संकल्प से सिद्धि” का प्रतीक है। योग और पंचकर्म शरीर को डिटॉक्स (विषमुक्त) करने तथा मन को शांत करने की प्राचीन पद्धतियां हैं, जिन्हें इस कार्यशाला के माध्यम से सीखकर दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।

कार्यशाला के सत्रों में जेएनएनयू, दिल्ली के डॉ. विक्रम सिंह तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. संतोष ने योग चिकित्सा एवं मनोविज्ञान के वैज्ञानिक आधार पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। आयोजन सचिव एवं प्राचार्य डॉ. राजतिलक ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी प्रमोद कृष्णन ने अमृता विश्वविद्यालय की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु पौधे भेंट किए।

संयोजक डॉ. अशीमा श्रावण, सह-संयोजक डॉ. मनोज कुमार, मनीषा कांगड़ा एवं पद्मा धीमान ने बताया कि कार्यशाला के सत्र प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक आयोजित किए जाएंगे। उद्घाटन अवसर पर डॉ. नितिन कम्बोज, डॉ. अक्षय गौर, डॉ. नरेश सहित अनेक विशेषज्ञ, शोधार्थी, चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। लगभग 70 प्रतिभागी कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।

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