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हरिद्वार में पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा का गठन, 5 जुलाई को ज्वालापुर में होगी विशाल ओबीसी महापंचायत

हरिद्वार। धर्मपाल सिंह ठेकेदार की अध्यक्षता में जनपद हरिद्वार के विभिन्न पिछड़े वर्ग संगठनों की प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया ओबीसी समाज की लगभग 50 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद राजनीतिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर समाज को उसका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

कहा कि हरिद्वार जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर ओबीसी समाज चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है तथा जीत-हार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एवं पर्वतीय क्षेत्रों में ओबीसी समाज को टिकट नहीं मिलता है। इसके बावजूद विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इसी अन्याय एवं उपेक्षा के विरोध में तथा पिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा और उत्थान के उद्देश्य से *”पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा हरिद्वार” का गठन किया गया है। मोर्चा की मांग है कि हरिद्वार विधानसभा और रानीपुर विधानसभा ओबीसी समाज बाहुल्य क्षेत्र है। इन दोनों विधानसभाओं से ओबीसी समाज के लोगों को टिकट मिलना चाहिए।

मोर्चा के नेतृत्व में आगामी 5 जुलाई 2026 को शुभारंभ बैंकेट हॉल ज्वालापुर, हरिद्वार में प्रातः 11 बजे से एक विशाल ओबीसी महापंचायत एवं जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक पार्टियों के ओबीसी समाज के नेता सादर आमंत्रित है और जिले भर से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस कार्यक्रम में समाज की राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक न्याय, आरक्षण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

इस अवसर पर धर्मपाल सिंह ठेकेदार एवं विनोद मलिक ने कहा कि ओबीसी समाज अब पूरी तरह जागरूक और संगठित हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो राजनीतिक दल समाज की अनदेखी करेंगे, उन्हें आने वाले चुनावों में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “जितनी हमारी भागीदारी है, उतनी हमारी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।”*

विजयपाल सिंह एवं संजय सैनी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के समय पिछड़े वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था, लेकिन वर्ष 2014 में पर्वतीय गांवों में रहने वाले गंगाडी समुदाय, राठ समुदाय, मारछा और तोलछा समुदाय, खांसी/ खस राजपूत, शिल्पकार/ लोहार/ताम्रकार को जातिगत और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर ओबीसी श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद मूल पिछड़े वर्ग के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने मांग की कि मंडल आयोग की संस्तुतियों एवं उत्तर प्रदेश की व्यवस्था के अनुरूप उत्तराखण्ड में भी पिछड़े वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए। पूरे उत्तराखंड में 20% से अधिक ओबीसी समाज है। इस हिसाब से 14 विधानसभा सीटों पर ओबीसी समाज की दावेदारी बनती है जो कि नहीं दी जा रही है इसकी पूर्ति केवल हरिद्वार जिले में अधिक से अधिक ओबीसी समाज को टिकट देकर की जा सकती है। सतीश मलिक एवं उज्ज्वल वालिया ने कहा कि बार-बार जाति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण की व्यवस्था से पिछड़े वर्ग के लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल ओबीसी वर्ग पर लागू क्रीमी लेयर व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए तथा समाज के व्यापक हित में इसे समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए।

पार्षद अनुज सिंह एवं धनीराम सैनी ने कहा कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, उसी प्रकार विधानसभा एवं लोकसभा में भी ओबीसी समाज के लिए आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि यदि समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक एक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।

बैठक में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पिछड़ा वर्ग अब अपने संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक सम्मान एवं राजनीतिक भागीदारी के लिए संगठित संघर्ष करेगा। आगामी 5 जुलाई की महापंचायत इसी संघर्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इस अवसर पर एडवोकेट धर्मवीर कश्यप, श्री मदनपाल गुर्जर, श्री सुधीर ठेकेदार, डाक्टर प्रेम प्रकाश सतेलवाल, विजय प्रजापति आदि भी उपस्थित रहे।

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