विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेश-हर बच्चे के हाथ में किताब हो और हर बच्चे की आँखों में सपने हों
बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर सबसे बड़ा आघात
शिक्षा, संस्कार और सम्मानजनक अवसर प्रत्येक बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार
परमार्थ निकेतन से बाल श्रम मुक्त, शिक्षित और सशक्त भारत के निर्माण का सामूहिक आह्वान
मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला जी आये परमार्थ निकेतन
परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग
ऋषिकेश। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आह्वान किया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और प्रेमपूर्ण वातावरण प्रदान करना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला जी उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता शुक्ला, श्री आशीष कुमार श्रीवास्तव (आईएएस), एसएससी प्रयागराज, उप सचिव परमार्थ निकेतन पधारे। इस अवसर पर उन्होंने परम पावन परमार्थ गंगा तट पर आयोजित दिव्य परमार्थ गंगा आरती में श्रद्धापूर्वक सहभाग किया। आरती के दौरान उन्होंने माँ गंगा से विश्व शांति, मानव कल्याण तथा राष्ट्र की समृद्धि हेतु प्रार्थना की। उन्होंने कहा की पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति की अनुपम अनुभूति प्राप्त की।
इस अवसर पर श्रीरामकथा व्यास संत मुरलीधर जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, श्री आशीष श्रीवास्तव जी, चेयरमेन श्री गोपाल कृष्णन जी, श्री राजीव श्रीवास्तव जी, श्री आर के जैन जी, डायरेक्टर श्री अभिषेक केसरवानी जी, श्रीमती कोमल केसरवानी जी, डायरेक्टर श्री सतीष टी जे, श्रीमती अनु प्रसाद जी, डा अभिषेक कुमार श्रीवास्तव जी, श्री राहुल के और अनेक पदाधिकारियों ने सहभाग किया।
श्रीराम कथा के मंच से पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बच्चे किसी भी राष्ट्र की सबसे मूल्यवान धरोहर होते हैं। उनके कोमल हाथों में पुस्तकें, कलम और ज्ञान के साधन होने चाहिए, न कि श्रम और शोषण का बोझ। जिस समाज में बच्चे अपने बचपन को जीने के बजाय मजदूरी करने को विवश होते हैं, वहाँ विकास और समृद्धि का सपना अधूरा रह जाता है।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक असमानता, अशिक्षा और संवेदनहीनता का परिणाम है। जब कोई बच्चा स्कूल के बजाय कारखानों, दुकानों, होटलों या अन्य कार्यस्थलों पर कार्य करता है, तब उसका बचपन, उसका भविष्य और उसके सपने प्रभावित होते हैं। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपने व्यक्तित्व के समग्र विकास का अवसर मिलना चाहिए।
पूज्य स्वामी जी ने कहा, “बच्चे ईश्वर का स्वरूप हैं। उनके चेहरे की मुस्कान, उनकी जिज्ञासा और उनके सपने मानवता की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं। यदि हम वास्तव में एक सशक्त, समृद्ध और संवेदनशील भारत का निर्माण करना चाहते हैं तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा श्रम के बंधनों में न बंधे और हर बच्चा शिक्षा के प्रकाश से आलोकित हो।”
उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन केवल कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प नहीं लेता कि वह किसी भी रूप में बाल श्रम को प्रोत्साहित नहीं करेगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
परमार्थ निकेतन द्वारा वर्षों से शिक्षा, संस्कार, नारी एवं बाल सशक्तिकरण तथा सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। गुरूकुलों के माध्यम से शिक्षा और संस्कारों का संचार किया जा रहा है। पूज्य स्वामी जी के मार्गदर्शन में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गुरूकुलों के माध्यम से शिक्षा, संस्कार, ज्ञान और संस्कृति का संचार किया जा रहा है ताकि एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सके।

स्वामी जी ने कहा कि बच्चों को शिक्षित करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सम्मानजनक अवसर प्रदान करना राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है इसलिये अपने आसपास ऐसे बच्चों की पहचान करे जो किसी कारणवश शिक्षा से वंचित हैं और उन्हें विद्यालय से जोड़ने में सहयोग करे। एक बच्चे को शिक्षा से जोड़ना केवल उसके जीवन को नहीं बदलता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी उज्ज्वल बनाता है। हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सम्मान प्राप्त हो यही सच्चे अर्थों में मानवाधिकारों का सम्मान है।
आइए, विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम के बोझ तले न दबे, बल्कि शिक्षा, संस्कार, सुरक्षा और प्रेम के वातावरण में खिले और बाल श्रम मुक्त भारत, सशक्त भारत और समृद्ध भारत का निर्माण हो।
परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती में श्री के. नागराज जी, श्री परिजात दीवान जी, श्री सुरेन्द्र कुमार जी, श्री शैलेन्द्र उत्तम जी, श्री भक्तिप्रसाद जी, श्री सोनोवाल जी, श्री रवि कुमार जी, श्री गौतम राय जी, श्री राहुल जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं पदाधिकारियों ने सहभाग कर माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
