परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी वृन्दावन यात्रा पर, बांके बिहारी जी के दर्शन कर भारत की समृद्धि, शांति और मंगल की प्रार्थना
सिग्नेचर वृन्दावन धान का उद्घाटन
श्रीराम कथा महोत्सव 2026 का शुभारम्भ
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और श्री भरतर्षभ दास जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रस्टी अक्षय पात्र फाउंडेशन का पावन सान्निध्य
भारत के 14 वें राष्ट्रपति, माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी की गरिमामयी उपस्थिति
मानस कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी के श्रीमुख से अमृतमय श्रीराम कथा की ज्ञान धारा प्रवाहित
वृन्दावन, 8 अगस्त। श्रीराधा-कृष्ण जी की प्रेममयी लीलाओं से पावन, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की सनातन साधना-भूमि वृन्दावन धाम में आज आध्यात्मिकता, सेवा, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का अद्भुत संगम हुआ। परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की पावन सान्निध्य में वृन्दावन की पुण्य धरा पर सिग्नेचर वृन्दावन धाम के उद्घाटन हुआ। वही दूसरी ओर श्रीराम कथा महोत्सव 2026 का भव्य एवं मंगलमय शुभारम्भ हुआ।
इस पावन अवसर पर श्री भरतर्षभ दास जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रस्टी, अक्षय पात्र फाउंडेशन का भी पावन सान्निध्य रहा। कार्यक्रम में भारत के 14वें राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की। मानस कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी के श्रीमुख से श्रीराम कथा की अमृतमयी ज्ञानधारा प्रवाहित हुई।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री बांके बिहारी जी के पावन दर्शन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की प्रार्थना की।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वृन्दावन वह भावभूमि है जहाँ प्रेम, स्वयं साधना बन जाता है और भक्ति स्वयं जीवन का दर्शन। यहाँ की रज-रज में श्रीराधा-कृष्ण जी की लीलाओं की स्मृतियाँ हैं, यहाँ की वायु में नाम-स्मरण है और यहाँ की चेतना में प्रेम, समर्पण तथा करुणा का संदेश प्रवाहित होता है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के दो ऐसे दिव्य प्रकाश-स्तंभ हैं, जिन्होंने जीवन को धर्म, प्रेम, मर्यादा और लोकमंगल का मार्ग दिखाया। श्रीरामजी हमें मर्यादा, कर्तव्य और त्याग की प्रेरणा देते हैं और श्रीकृष्ण जी हमें प्रेम, कर्मयोग, समत्व और धर्म की स्थापना का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि आज जब विश्व अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारत की सनातन संस्कृति के संदेश वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः और सर्वभूतहिते रताः की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करती आई है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की भूमि वृन्दावन हमें प्रकृति और परमात्मा के अभिन्न संबंध का भी संदेश देती है। श्रीकृष्ण का जीवन गौ, गंगा, गोवर्धन, यमुना जी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है।
कार्यक्रम में श्री भरतर्षभ दास जी ने सेवा, संस्कार और भोजन के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। अक्षय पात्र फाउंडेशन की सेवा-परंपरा को भारतीय संस्कृति की उस भावना से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अन्नदान केवल भोजन देना नहीं, बल्कि किसी के जीवन में आशा, सम्मान और भविष्य का आधार देना है।
माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आध्यात्मिक आयोजन को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। उन्होंने भारत की सनातन शक्ति उसकी आधुनिक उपलब्धियों के साथ-साथ आध्यात्मिक विरासत, संस्कृति, संस्कार और सेवा-परंपरा के संरक्षण हेतु प्रेरित किया।

संत श्री मुरलीधर जी के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीराम कथा की अमृतधारा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वृन्दावन की पावन धरा पर आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव इस दिव्य संकल्प के साथ प्रारम्भ हुआ कि सनातन संस्कृति केवल स्मृति नहीं, वर्तमान की शक्ति और भविष्य का प्रकाश बने; अध्यात्म केवल व्यक्तिगत साधना न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण का माध्यम बने।

पूज्य स्वामी जी ने कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी और श्री रामनाथ कोविंद जी को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट किया।
