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हलाला के विरुद्ध प्रदेश में पहला मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता से मिलने पहुंचीं अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम

समान नागरिक संहिता लागू होने से मुस्लिम महिलाओं को हलाला व तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मिलेगी मुक्ति

हरिद्वार । प्रदेश में हलाला जैसी कुप्रथा के विरुद्ध साहसिक कदम उठाते हुए पहला मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से आज उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती फरजाना बेगम उनके गांव बांद्रजूर्द बुग्गावाला पर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता एवं उसके परिजनों से भेंट कर विस्तार से बातचीत की, उसकी स्थिति की जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहयोग एवं न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का आधार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकारों में निहित होता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू किए जाने का निर्णय ऐतिहासिक एवं दूरगामी प्रभाव वाला है, जिससे महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि हलाला एवं तीन तलाक जैसी कुप्रथाएं न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन करती हैं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाती हैं। ऐसे में इन कुप्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पीड़िता के साहस, दृढ़ता एवं जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ताकत देगा।
उपाध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार एवं अल्पसंख्यक आयोग पीड़िता के साथ मजबूती से खड़े हैं और मामले में निष्पक्ष एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित कराने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महिला के साथ कुप्रथा या परंपरा के नाम पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने प्रदेश सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं को कानूनी संरक्षण मिलेगा और समाज में समानता एवं न्याय की भावना को बल मिलेगा।

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