Thu. Mar 12th, 2026

गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ासनातन नाथ योग परंपरा, जिसके आदि आचार्य महायोगी गुरु गोरखनाथ जी महाराज हैं, भारत की आध्यात्मिक चेतना की मेरुदंड रही है। इसी दिव्य, सिद्ध और अलख निरंजन परंपरा के तेजस्वी साधक, शिवभक्त योगी और नाथ पंथ के गौरव हैं —

श्री श्री 1008 योगी नन्दा नन्द नाथ जी महाराज।

महाराज श्री आई पंथ की नाथ परंपरा से दीक्षित हैं और उनका संपूर्ण जीवन गुरु गोरखनाथ जी की आज्ञा, योग-साधना और वैराग्य में रमा हुआ है। नाथ संप्रदाय में गुरु को स्वयं शिव-तत्व का साकार रूप माना गया है, और महाराज श्री का जीवन इसी गुरु-भक्ति का जीवंत प्रमाण है।

शिव-भक्ति, नाथ योग और साधकों की चेतना जागृत करने वाला एक दिव्य स्थल है। काशी की पवित्र भूमि पर स्थित यह आश्रम गुरु गोरखनाथ जी की योग परंपरा का जीवंत केंद्र है।

गुरु गोरखनाथ अलख अखाड़ा परिषद में दायित्व

नाथ परंपरा के प्रचार, संरक्षण एवं संगठनात्मक विस्तार को दृष्टिगत रखते हुए

गुरु गोरखनाथ अलख अखाड़ा परिषद द्वारा

श्री श्री 1008 योगी नन्दा नन्द नाथ जी महाराज को

हरियाणा प्रदेश प्रभारी के रूप में विधिवत मनोनीत किया गया है।

यह मनोनयन

हरि किशन नाथ महाराज जी के कर-कमलों द्वारा

परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष

श्री संजीवन नाथ महाराज जी के मार्गदर्शन में

तथा राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार के अनुमोदन से

घोषित किया गया।

यह दायित्व महाराज श्री की नाथ निष्ठा, गुरु भक्ति, संगठन क्षमता और तपस्वी जीवन पर परिषद के पूर्ण विश्वास का प्रतीक है।

संन्यास और वैराग्य

संन्यास पूर्व महाराज श्री का गोत्र भारद्वाज रहा, किंतु नाथ दीक्षा के पश्चात उन्होंने समस्त सांसारिक पहचानों का त्याग कर स्वयं को पूर्णतः नाथ पंथ और गुरु गोरखनाथ जी की सेवा में समर्पित कर दिया।

नाथ परंपरा में साधक की पहचान केवल —

अलख, योग, गुरु और शिव कृपा से होती है।

जीवन दर्शन

महाराज श्री का जीवन मौन, संयम और तप से परिपूर्ण है। वे शब्दों से अधिक साधना द्वारा उपदेश देते हैं। उनका सान्निध्य ही साधकों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन बन जाता है।

वे कहते हैं —

“जहाँ गुरु गोरखनाथ की कृपा है,

वहीं योग है,

वहीं शिव है,

और वहीं मोक्ष का द्वार है।”

समाज के लिए संदेश

आज के विचलित और भौतिक युग में श्री श्री 1008 योगी नन्दा नन्द नाथ जी महाराज जैसे संत नाथ परंपरा की ध्वजा को थामे हुए गुरु गोरखनाथ जी के अलख निरंजन संदेश को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *