-अगाध प्रेम और अकाट्य समर्पण की सलिल सरिता, श्री राधा रानी जी प्राकट्य दिवस पर शुभकामनायें
-भारत के 13वें राष्ट्रपति, भारत रत्न स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि
-प्रेम कोई लेन-देन नहीं, बल्कि एक निःस्वार्थ भाव : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। सनातन संस्कृति के दिव्य मूल्यों, भक्ति, करुणा और समर्पण का जीवंत स्मरण दिवस श्री राधा रानी जी के प्राकट्य दिवस की देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनायें।
अगाध प्रेम और अकाट्य समर्पण की सलिल सरिता श्री राधा रानी प्रेम की वह अनंत धारा हैं, जो भौतिकता की सीमाओं को लाँघकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ती हैं। उनका समर्पण केवल श्रीकृष्ण जी के प्रति ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के प्रति आदर्श प्रस्तुत करता है। उनका जीवन संदेश देता हैं कि प्रेम कोई लेन-देन नहीं है, बल्कि एक निःस्वार्थ भाव है जिसमें समर्पण है, करुणा है और माधुर्य है।
श्री राधा जी के बिना श्रीकृष्ण अधूरे हैं और श्री कृष्ण बिना राधा जी। यही भाव भक्ति की गहराई को प्रकट करता है। श्रीमद्भागवत महापुराण, गीता और भक्ति-साहित्य में श्री राधा जी का स्मरण, प्रेम और भक्ति के शिखर रूप में होता आया है। संत सूरदासजी, मीराबाई, रसखान और अन्य कवियों ने राधा-कृष्ण लीला को मानव-जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक के रूप में वर्णन किया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्री राधा रानी का जीवन हमें संदेश देते है कि जब तक हमारे हृदय में अहंकार का स्थान है, तब तक वास्तविक प्रेम संभव नहीं। राधा जी ने अपने अस्तित्व को श्री कृष्ण में विलीन कर दिया। यही आत्मसमर्पण का आदर्श है, जो आज के समय में भी हमें मार्गदर्शन देता है। जब मनुष्य अपने कर्तव्यों, अपने कर्म और अपनी निष्ठा को ईश्वर को समर्पित करता है, तभी जीवन का सार्थकता से भर जाता है।
स्वामी जी ने कहा कि राधा जी का प्रेम केवल मानवीय स्तर पर नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय स्तर पर भी हमें जोड़ता है। आज के तनावग्रस्त जीवन में प्रतिस्पर्धा, अहंकार और स्वार्थ के कारण समाज बिखर रहा है। ऐसे में राधा का निःस्वार्थ प्रेम और करुणा हमें पुनः एकजुट करने की क्षमता रखता है। उनकी भक्ति हमें यह स्मरण कराती है कि भले ही जीवन में कठिनाइयाँ आएं, पर यदि हमारा हृदय भक्ति और प्रेम से परिपूर्ण है, तो हर पीड़ा भी माधुर्य में बदल जाती है।
श्री राधा रानी का प्राकट्य दिवस एक उत्सव के साथ उनके आदर्शों को जीवन में धारण करना भी है। राधा जी का दिव्य प्रेम हमारे जीवन में अमृत बनकर उतरे और हमारे हृदयों को सदा प्रेम, करुणा और माधुर्य से भर दे।
स्वामी जी ने भारत के 13वें राष्ट्रपति, भारत रत्न स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि राष्ट्र निर्माण और भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायी रहेगा।