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-कन्या है तो कल है : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
-वेद में कोई भेद नहीं है : स्वामी रामदेव

ऋषिकेश/ज्वालापुर। पतंजलि योगपीठ में आयोजित “सनातन के शाश्वत सत्य पतंजलि वार्षिकोत्सव- पार्ट 2” का आयोजन योग और संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में हुआ। जिसमें कई गुरूकुलों के विद्यार्थियों ने सहभाग कर अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इस पावन अवसर पर योगगुरू पूज्य स्वामी रामदेव जी और पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी के पावन सान्निध्य में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य म म स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी, पूज्य म म स्वामी हरिचेतनानन्द जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी और अनेक पूज्य संतों, गणमान्य विभूतियों, आचार्यों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को अलौकिक बना दिया।
कार्यक्रम के अवसर पर विशेष रूप से वर्ल्ड गर्ल्स चाइल्ड डे का पावन संदेश साझा किया गया। योगगुरू पूज्य स्वामी रामदेव जी ने कहा कि वेदों में कहीं भी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में बेटियों की भूमिका न केवल अनिवार्य है, बल्कि दिव्य और परम शक्ति से परिपूर्ण है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर कहा कि भारत को पुनः ऐसे गुरुकुलों की आवश्यकता है, जहाँ से वेदमंत्रों की गूंज पूरे विश्व में गूंजे, जहाँ से केवल शिक्षा नहीं, संस्कार और सनातन संस्कृति का प्रकाश प्रसारित हो। ऐसे गुरुकुल ही राष्ट्र की आत्मा को जागृत कर सकते हैं और विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश दे सकते हैं। यही भारत की असली शक्ति है।
“बेटी केवल परिवार की नहीं, बल्कि देश और संस्कृति का गौरव है। यदि हम आज बेटियों को सम्मान, शिक्षा और अवसर देंगे, तो वही कल के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेंगी।”
“कन्या है तो कल है।” बेटियाँ केवल घर की शक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की नींव हैं। उनकी शिक्षा, संस्कार और सम्मान ही समाज और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। बेटियों को केवल संरक्षित करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने, उनके अधिकारों को मान्यता देने और उनके सपनों को साकार करने के लिए अवसर प्रदान करने की भी आवश्यकता है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और संस्कार प्रदान करना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि अध्यात्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने उपस्थित छात्राओं को भी प्रेरित किया कि वे अपने भीतर की शक्ति को पहचानें और किसी भी परिस्थिति में निडर होकर अपने सपनों को साकार करने के लिये कार्य करते रहे।
म म पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी ने कहा कि बेटी केवल घर के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी भविष्य की दृष्टी से अमूल्य हैं। उन्होंने कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है, तो पूरा परिवार जागता है; जब वह आगे बढ़ती है, तो राष्ट्र प्रगति करता है; और जब वह आत्मनिर्भर और जागरूक होती है, तो समाज में अंधकार मिटता है।
म म पूज्य स्वामी हरिचेतनानन्द जी ने कहा कि बेटियाँ केवल परिवार की धरोहर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की शक्ति हैं। उनके सम्मान, शिक्षा और सशक्तिकरण से ही उज्जवल भविष्य संभव है। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे हर बेटी को अवसर, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करें।
आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि यह समय केवल बेटी को बचाने का नहीं है, बल्कि उसे सम्मान देने, सशक्त बनाने और उसके अधिकारों की रक्षा करने का है। उन्होंने बताया कि योग, संस्कार और शिक्षा का समन्वय ही बेटियों को सशक्त बनाने का वास्तविक मार्ग है।
पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, योगाभ्यास और श्लोक-पाठ ने कार्यक्रम की भव्यता को चार चांद लगाये। पतंजलि परिवार ने सभी पूज्य संतों और विभूतियों का अभिनन्दन किया।

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