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*अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण का संदेश, शिक्षा और स्वावलंबन पर जोर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सुमाड़ी स्थित डिमरी लॉज में महिला डेरी विकास विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की महिला सदस्यों के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शास्त्रों में भी कहा गया है—“यत्र पूज्यते नारी, रमन्ते तत्र देवता।” उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में महिलाओं का सम्मान और योगदान सदैव प्रमुख रहा है। आज के समय में शिक्षा, स्वावलंबन, समान अवसर और सम्मान एक सशक्त महिला के मूल अधिकार हैं, जिनके लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही हैं।

अधिशासी अभियंता डॉ. मीनल गुलाटी ने कहा कि यदि एक महिला शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित हो जाते हैं। उन्होंने शिक्षा को मनुष्य का “तीसरा नेत्र” बताते हुए कहा कि रोटी, कपड़ा, मकान के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा और समाज में महिलाओं का समान अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए, तभी देश का समग्र विकास संभव है। उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों में महिलाओं की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय महिला सशक्तिकरण का दौर है और महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों से आई जनप्रतिनिधियों, बालिकाओं और महिलाओं ने कविता, गीत और भाषण के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में महिलाओं को भ्रूण हत्या रोकने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प भी दिलाया गया।

सहायक निदेशक भूपेंद्र सिंह विष्ट ने कहा कि महिला डेरी योजना विशेष रूप से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। डेरी के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं और इससे पलायन की समस्या पर भी नियंत्रण संभव है। कार्यक्रम का संचालन सहदेव पुंडीर ने किया।

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