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वैश्विक मंचों पर सनातन संस्कृति की ध्वजा फहराकर परमार्थ निकेतन लौटीं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी
संन्यासी जीवन परन्तु अद्भुत वैश्विक योगदान
ऋषिकेश। अपनी विदेश यात्रा के पश्चात, अंतर्राष्ट्रीय महासचिव, जीवा एवं प्रखर आध्यात्मिक वक्ता पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी पुनः देवभूमि ऋषिकेश, परमार्थ निकेतन पधारी। भारतीय सनातन संस्कृति, अध्यात्म, और मानवीय सेवा के मूल्यों से ओत-प्रोत साध्वी जी का जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारतीय दर्शन में संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोने की अद्भुत क्षमता है।
मूल रूप से लॉस एंजिल्स (अमेरिका) की रहने वाली और विश्व के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाली साध्वी जी पिछले 30 वर्षों से ऋषिकेश में मां गंगा के पावन तट पर अपने गुरु परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में सेवा और साधना का जीवन जी रही हैं।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने विश्व के अनेक वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति का शंखनाद किया हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर कई ऐतिहासिक मंचों पर भारतीय संस्कृति, योग, और सनातन दर्शन का संदेश दिया है। साध्वी जी संयुक्त राष्ट्र के धार्मिक सलाहकार परिषद की एक सक्रिय और प्रभावशाली सदस्य हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क और जिनेवा मुख्यालयों में कई बार वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण, जल, और स्वच्छता जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान हमारे वेदों और सनातन ग्रंथों की जीवनशैली में समाहित है।
विश्व धर्म संसद, शिकागो और दुनिया के अन्य हिस्सों में आयोजित होने वाली विश्व धर्म संसद में साध्वी जी ने एक मुख्य वक्ता के रूप में कई बार शिरकत की है। उन्होंने वहां श्वसुधैव कुटुम्बकम् के विचार को तार्किक और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ दुनिया के सामने रखा।
परमार्थ निकेतन में हर वर्ष आयोजित होने वाले विश्वप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की वे मुख्य निदेशिका हैं। इस मंच के माध्यम से उन्होंने दुनिया के 100 से अधिक देशों से आने वाले साधकों को योग के केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक स्वरूप से परिचित कराया है।
साध्वी जी ने दुनिया के अग्रणी तकनीकी और बौद्धिक मंचों पर अपने व्याख्यानों के माध्यम से पश्चिमी जगत के भौतिकवादी विचारों को भारतीय अध्यात्म की शांति से जोड़ने का एक उत्कृष्ट सेतु बनाया है।
साध्वी जी एक प्रखर वक्ता होने के साथ-साथ एक अत्यंत प्रभावशाली और बेस्टसेलर लेखिका भी हैं। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से पाश्चात्य जगत के लोगों को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित किया है। उनकी प्रमुख पुस्तकें हॉलीवुड टू द हिमालयाज- अ जर्नी ऑफ हीलिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन, यह साध्वी जी की सबसे प्रसिद्ध और बेस्टसेलर आत्मकथा है। इस पुस्तक में उन्होंने लॉस एंजिल्स के एक संभ्रांत यहूदी परिवार में जन्म लेने, स्टैनफोर्ड में पढ़ाई करने से लेकर 1996 में भारत आने और मां गंगा के स्पर्श से हुए अपने अनुभवों को साझा किया है।
बाय गॉड्स ग्रेस इस पुस्तक में साध्वी जी ने अपने परम पूज्य गुरु स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के गौरवशाली जीवन, उनके सेवा कार्यों और उनके आध्यात्मिक संदेशों को बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक रूप से संकलित किया है।
भारत के इतिहास में पहली बार तैयार किए गए 11 विशाल खंडों वाले हिंदू धर्म के विश्वकोश की वे मुख्य प्रबंध संपादक रही हैं। इस ऐतिहासिक परियोजना को पूरा करने में उनका योगदान अतुलनीय है, जिसने सनातन धर्म के ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रलेखित किया है।
जहाँ आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति और भौतिकता की अंधी दौड़ में दौड़ रही है, वहीं साध्वी जी ने स्टैनफोर्ड जैसे संस्थान से शीर्ष शिक्षा पाकर भी अध्यात्म और गंगा तट को चुना।
वैश्विक मंचों पर सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक और तार्किक पक्ष को जिस प्रकार वे रखती हैं, वह अद्वितीय है। वे वास्तव में भारतीय संस्कृति की वैश्विक अग्रदूत हैं।
उनकी विदेश यात्रा से वापसी पर संपूर्ण परमार्थ परिवार एवं ऋषिकुमारों में हर्ष का माहौल है। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों और आचार्यों ने पुष्प वर्षा व
शंख ध्वनि कर साध्वी की अपने ही आश्रम परमार्थ निकेतन में अभिनन्दन किया।

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